अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

शिक्षा प्राप्त करना हर एक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है यह तो आप सभी जानते हो और वर्तमान में शिक्षा ग्रहण करना कितना ज्यादा जरूरी है यह भी आप सभी अच्छे से जानते हो. इसलिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है.

आज के समय और आने वाले भविष्य में शिक्षा से कोई भी वंचित न रहे इस उद्देश्य को सफल बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस (International literacy day) पूरे विश्व में मनाया जाता है और आज के इस आर्टिकल में हम विश्व साक्षरता दिवस और उसके थीम के बारे में जानेंगे. 

इस लेख से आपको जानने को मिलेगा की अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्या है? क्यों मनाया जाता है? कब मनाया जाता है और इसे मनाने का उद्देश्य क्या है? आइए फिर बात करते है अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के बारे में.

साक्षरता का अर्थ क्या है?

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्या है और क्यों मनाया जाता है यह जानने से पहले आपका यह जानना जरूरी है की साक्षरता का अर्थ आखिर क्या है? साक्षरता का अभिप्राय साक्षर होने से ही है यानी की संपूर्ण रूप से जो भी व्यक्ति किसी व्यक्तिगत भाषा को पढ़ सकता है, लिख सकता और उसे याद कर सकता है, वह साक्षर कहलाता है. 

साक्षर की परिभाषा दुनिया के अलग-अलग देशों में अलग-अलग है लेकिन भारत में साक्षर वह व्यक्ति कहलाता है जो अपना नाम लिखने और उसे पढ़ने में सक्षम होता है.

पर यहां आपको एक बात का ध्यान रखना आवश्यक है की आज की बढ़ती हुई जनसंख्या, टेक्नोलॉजी और इंटरनेट की इस दुनिया में साक्षरता का अर्थ बदल गया है. सिर्फ पढ़ा लिखा होना ही काफी नही है बल्कि डिजिटल युग में आपको डिजिटल चीजों के बारे में भी ज्ञान होना चाहिए. 

International literacy day in hindi
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यदि आप सफलता प्राप्त करना चाहते हो तो, समय में बदलाव के साथ कई सारी नई चीजे अस्तित्व में आ रही है जिसके अनुसार आगे बढ़ना जरूरी है. यदि ऐसा नही किया जाएगा तो दुनिया आपसे कही ज्यादा आगे निकल जायेगी.

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अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है?

पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जायेगा इसका फैसला 7 नवंबर 1965 को यूनेस्को द्वारा किया गया था. उन्होंने इस दिवस को पूरे विश्व में मानने के लिए एक निश्चित तारीख निर्धारित की थी जिसके अनुसार आज उसी तारीख को विश्व साक्षरता दिवस हर साल मनाया जाता है. 

साल 1965 में इस दिवस को मनाने का फैसला करने के बाद साल 1966 से ही इस दिवस को मनाना शुरू कर दिया गया था. 8 सितंबर 1966 वह दिन था जब पूरी दुनिया में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया गया और तब से लेकर आज तक इसी दिन यह दिवस मनाया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता हैं?

इस समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह अधिकार है की वह मानव विकास और समाज के प्रति अपने अधिकारों को जाने और यह संभव हो सकता है केवल शिक्षा के द्वारा. 

अतः अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य है की हर व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त हो तथा मानव चेतना को बढ़ावा दिया जा सकें. 

साक्षरता यानी की शिक्षा ही एकमात्र जरिया है जिसके माध्यम से समाज से कई सारी कुरीतियों को समाप्त किया जा सकता है तथा गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि समस्याओं का सामना किया जा सकता है.

साक्षरता दिवस मनाने की जरूरत क्यों हैं?

जैसा की आपको पता ही होगा की आज के समय में शिक्षा ग्रहण करना कितना ज्यादा जरूरी हो गया है. यदि एक व्यक्ति को अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करनी है तो उसके लिए जरूरी है शिक्षा ग्रहण. 

इसी उद्देश्य से आज पूरे विश्व में कई सारे शिक्षण संस्थान स्थापित किए गए है. हालांकि बहुत से लोग दिन प्रतिदिन शिक्षित हो रहे है लेकिन इस बीच बहुत से लोग ऐसे भी है जिनको शिक्षा मिल ही नही रही पा रही है. सरल शब्दों में कहा जाए तो वे अनपढ़ होते जा रहे हैं. खासकर महिलाओं को शिक्षा का अधिकार देना आज भी भारत जैसे देश के कई सारे इलाकों में सही नही समझा जाता है.

पुरुषों की संख्या भी बहुत ही ज्यादा है हालांकि यह महिलाओं की संख्या से कम ही है लेकिन अगर समाज को विकसित करना है तो शिक्षा का सामान अधिकार सबको होना चाहिए. 

आज के समय में शिक्षित होना अति आवश्यक है और यह तभी संभव हो पाएगा जब लोगों को शिक्षा का महत्व समझ में आयेगा. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस को अस्तित्व में लाया गया ताकि समाज के सभी लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जा सके. 

अतः इसी महोत्सव के द्वारा लोगों को साक्षरता के बारे में बताया जा सकता है. इसीलिए साक्षरता दिवस मनाना हमारे लिए जरूरी है.

भारत की साक्षरता दर कितनी हैं?

आपके लिए यह भी जानना जरूरी है की भारत की साक्षरता दर वर्तमान समय में कितनी है? खासकर यदि आप भारतीय है तो. 

2022 में भारत में महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% है और पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% है. अतः भारत की औसतन साक्षरता दर की बात की जाए तो यह 77.7% है जो की आज से लगभग 12 साल पहले 2011 में यह 73% था. 

2022 में जाके आज इस दर में 4% तक वृद्धि हुई है. वही अगर बात की जाए सबसे ज्यादा साक्षरता दर की तो भारत का केरल राज्य इसमें सबसे आगे है जिसकी साक्षरता दर 96.2% है.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2023 की थीम क्या है?

विश्व साक्षरता दिवस शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को सुलझाने के लिए तो मनाया जाता है लेकिन इसके साथ समाज से जुड़े कुछ अन्य समस्याओं को भी सामने लाया जाता है. इसलिए प्रत्येक वर्ष इसके लिए एक थीम निर्धारित की जाती है.

चूंकि अभी इस साल के अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2024 की थीम (International literacy day 2024 theme) अभी घोषित नहीं की गई है. इसलिए हम अभी आपको बता नहीं सकते है.

पिछले साल अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2023 की थीम ‘परिवर्तनशील दुनिया के लिए साक्षरता को बढ़ावा देना: टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाजों की नींव का निर्माण करना’. (‘Promoting literacy for a world in transition: Building the foundation for sustainable and peaceful societies’.) है.

इसके अलावा बीते कुछ वर्षों में जिन भी विषय को आधार मानकर विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया है उनकी सूची हमने यहां नीचे प्रदान की है. 

  • 2006 का विषय “साक्षरता सतत विकास” था जिसका उद्देश्य सामाजिक प्रगति पर ध्यान देना था.
  • “साक्षरता और स्वास्थ्य” 2007 और 2008 का विषय था जिसका उद्देश्य महामारी (एचआईवी, टीबी और मलेरिया आदि जैसी फैलने वाली बीमारी) और साक्षरता पर ध्यान देना था.
  • “साक्षरता और सशक्तिकरण” विषय 2009 का था जिसका उद्देश्य“ लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण” मुद्दे को सामने लाना था.
  • “साक्षरता विकास को बनाए रखने” का विषय 2010 के विश्व साक्षरता दिवस का विषय था.
  • साक्षरता और महामारी (एचआईवी, क्षय रोग, मलेरिया, आदि जैसे संक्रमणीय बीमारियों) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए “साक्षरता और स्वास्थ्य” साल 2011 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का विषय था.
  • लैंगिक समानता और महिलाओं को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए “साक्षरता और सशक्तिकरण” 2012 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की थीम थी.
  • 2013 में विश्व साक्षरता दिवस का विषय शांति के लिए साक्षरता के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने के लिए “साक्षरता और शांति” विषय था.
  • “21 वीं शताब्दी के लिए साक्षरता” 2014 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का विषय था.
  • “साक्षरता और सतत विकास” वर्ष 2015 में विश्व साक्षरता दिवस का विषय था.
  • “अतीत पढ़ना, भविष्य लिखना” साल 2016 में विश्व साक्षरता दिवस का विषय था.
  • “डिजिटल दुनिया में साक्षरता” 2017 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के लिए थीम थी.
  • “साक्षरता और कौशल विकास” 2018 में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का विषय था.
  • “साक्षरता और बहुभाषावाद (Literacy and Multilingualism)” 2019 के लिए विश्व साक्षरता दिवस के लिए थीम थी.
  • “COVID-19 संकट और उससे परे साक्षरता शिक्षण और शिक्षा (Literacy teaching and learning in the COVID-19 crisis and beyond)” 2020 में आए हुए महामारी के दौरान विश्व साक्षरता दिवस का विषय था.
  • “मानव केंद्रित पुनर्प्राप्ति के लिए साक्षरता – डिजिटल विभाजन को कम करना” 2021 विश्व साक्षरता दिवस था.
  • “Transforming Literacy Learning Spaces” 2022 अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का विषय है.

सारांश

“अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस” विषय को आधार मानते हुए आज के इस लेख में हमने आपके साथ विश्व साक्षरता दिवस से जुड़ी कई सारी जानकारियां शेयर की है जैसे की अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्या है? यह कब मनाया जाता है? इस दिवस को मनाना जरूरी क्यों है? साक्षरता का क्या अर्थ है? भारत में साक्षरता दर कितनी है? आदि. 

इसके अतिरिक्त हमने कई अन्य प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दिए है. अतः हम भी यही आपसे उम्मीद करते है की इस लेख के द्वारा आपको अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के विषय में काफी कुछ सीखने को मिला होगा. यदि लेख पसंद आए तो इसे शेयर जरूर करें. 

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस से जुड़े आपके सवाल और हमारे जवाब

8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है?

यूनेस्को द्वारा 7 नवंबर 1965 को यह निर्णय लिया गया था की हर साल अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जायेगा और जिसको मानने की शुरुआत यूनेस्को ने ही 8 सितंबर 1966 को किया था. अतः इसी वजह से हर साल 8 सितंबर को ही अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पहली बार कब मनाया गया था?

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पहली बार 8 सितंबर 1966 को मनाया गया था.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस की शुरुआत किसने की?

यूनेस्को (Unesco) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की प्रथा शुरू की गई थी.

साक्षरता की परिभाषा क्या है?

साक्षरता का अभिप्राय साक्षर होने से है यानी की संपूर्ण रूप से जो भी व्यक्ति किसी व्यक्तिगत भाषा को पढ़ सकता है, लिख सकता और उसे याद कर सकता है, वह साक्षर कहलाता है.

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है?

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का मूल उद्देश्य पूरे विश्व में शिक्षा का प्रसार करना है ताकि प्रत्येक व्यक्ति शिक्षा ग्रहण कर सके और मानव विकास तथा समाज के प्रति अपने अधिकारों की पहचान कर सके.

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