राष्ट्रीय एकता दिवस पर निबंध, थीम एवं शायरी | National Unity Day Essay

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है हमारे इस ब्लॉग पर. आज की पोस्ट में हमलोग राष्ट्रीय एकता दिवस पर निबंध जानेंगे. जैसा कि आप लोग जानते हैं कि भारत अनेकता में एकता वाला देश है. यहां पर सभी धर्म के मानने वाले लोग रहते है एवं उनके बीच एकता की भावना भी है. 

इसलिए भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस प्रत्येक 31 अक्टूबर को मनाया जाता है. यह दिवस सरदार वल्लभभाई  पटेल के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. 

ऐसे में अगर आप राष्ट्रीय एकता पर एक बेहतरीन निबंध लिखना चाहते हैं, लेकिन आपको समझ में नहीं आ रहा था कि निबंध की शुरुआत कैसे करें तो हम आपसे निवेदन करेंगे कि हमारे आर्टिकल पर आखिर तक बने रहे, क्योंकि इस पोस्ट के अंत में National Unity Day Essay in Hindi संबंधित कुछ प्रश्न एवं उनके उत्तर (FAQs) भी जानेंगे.

राष्ट्रीय एकता दिवस पर निबंध [250 शब्द] 

राष्ट्रीय एकता दिवस प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को मनाया जाता है. इसी दिन सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था. उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में इसे पूरे भारतवर्ष में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. 

इसके पीछे और भी एक वजह है कि सरदार वल्लभभाई पटेल देश के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी थे, लेकिन जब भारत आजाद हुआ तो उस समय भारत में 565  रियासत थी उन्हें भारत में विलय करने का काम सरदार वल्लभ भाई पटेल ने काफी कूटनीतिक तरीके से किया. 

जिसके कारण ही भारत में सभी रियासतों का विलय आसानी पूर्वक हुआ. इसलिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में घोषणा की कि 31 अक्टूबर को अब से भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा ताकि हम सरदार बल्लभ भाई पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सके. 

राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है?

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात में हुआ था एवं भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका अतुल्य रही थी. जब भारत आजाद हुआ तो भारत के प्रथम गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को बनाया गया.

आजादी के बाद भारत में 565 रियासत थी जिन्हें भारत में विलय करने की जिम्मेदारी सरदार वल्लभ भाई पटेल को दी गई थी. सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इस काम को बड़े ही चतुराई के साथ किया और उन्होंने अपनी राजनीतिक सूझबूझ और कूटनीति का इस्तेमाल कर सभी रियासतों को भारत में  मिलाने का काम किया. जिसके कारण ही भारत एक राष्ट्र के रूप में निर्मित हो पाया. 

National Unity Day Essay in Hindi
Unity

इसीलिए 2014 में गुजरात के एक भाषण को संबोधित करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की के अब से सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन को भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा. ताकि देश के निवासियों में एकता की भावना को और भी तेजी के साथ मजबूत किया जा सके और देश में किस प्रकार एकता को बनाए रखना है. उसके बारे में लोगों को जागरूक किया जा सके एवं अधिक से अधिक लोग इस दिवस में सम्मिलित होकर सरदार बल्लभ भाई पटेल के दिखाए गए पद चिन्हों पर चलने का प्रयास करें तभी जाकर हमारे देश की एकता मजबूत और सशक्त हो पाएगी. 

Essay on National Unity Day in Hindi  [500 शब्द]

सरदार बल्लभ भाई पटेल ने भारत को निर्मित करने में अपनी जो भूमिका निभाई है उसे शब्दों में बयान करना असंभव है. उन्होंने अपनी राजनीतिक कूटनीति के माध्यम से भारत का एकीकरण किया और अखंड भारत के निर्माण में अपनी अतुल्य भूमिका निभाई. स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को भूल पाना किसी भी भारतीय के लिए संभव नहीं है.

उन्होंने गांधी जी के द्वारा संचालित सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन में उन्होंने भाग लिया. 

सरदार वल्लभभाई पटेल कांग्रेस पार्टी के एक सीनियर नेताओं में से एक थे.  उन्होंने समाज के हित के लिए कई प्रकार के जनहितकारी कार्य किए हैं. इसलिए सरदार वल्लभभाई पटेल एक सामाजिक कार्यकर्ता भी थे . 

जब भारत आजाद हुआ तो उस समय भारत में सभी रियासतें अलग अलग थी उन्हें भारत में मिलाने के लिए सरदार वल्लभ भाई पटेल ने राजनीतिक और सैन्य दोनों प्रकार के शक्तियों का इस्तेमाल किया. 

जो विरासत आसानी से भारत में विलय होने के लिए राजी हो गए. उनके साथ उन्होंने बातचीत का रास्ता अपनाया और जिन्होंने भारत में विलय होने से मना किया या वह भारत से अलग हटकर एक अलग राष्ट्र बनाने की उनकी एक अलग तमन्ना थी. उन पर उन्होंने सैन्य कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया जिसके फलस्वरूप सभी रियासतों को भारत में आसानी पूर्वक मिलाया गया. 

इसीलिए उन्हें भारत का लौह पुरुष भी कहा जाता है जब 2014 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बने तब उन्होंने इस बात की घोषणा की थी के सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्मदिन को भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में मनाया जाए ताकि लोगों को भी सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन को करीब से देखने का मौका मिले और हम उनके दिखाए गए रास्ते पर चलकर देश की अखंडता को और भी ज्यादा मजबूत और सशक्त कर सके. 

देश में 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मना कर हम सरदार वल्लभ भाई पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं इसलिए प्रत्येक देशवासी को इस दिन प्रण लेना चाहिए कि वह भारत की अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेगा और वक्त पड़ने पर जान देने से भी पीछे नहीं हटेगा तभी भारत देश की अखंडता बनी रहेगी.

प्रथम राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया गया?

सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर के दिन, प्रत्येक साल राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाएगा इसकी घोषणा 2014 में देश के प्रधानमंत्री के द्वारा किया गया. उसके बाद भारत के गृह मंत्रालय के द्वारा मंजूर किया गया. गृह मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि राष्ट्रीय एकता दिवस का पालन हमारे देश की अखंडता, एकता और सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है. 

ताकि हम देश में संभावित खतरे को कम कर सके और नागरिकों के अंदर राष्ट्रीय एकता की भावना को और भी ज्यादा मजबूत कर सके एवं देश के निवासी के प्रति अपने कर्तव्य को और भी अच्छी तरह निर्वाह कर सके. तभी तो हमारे देश की एकता बनी रहेगी. 

2014 में सरदार वल्लभ भाई पटेल के 139वीं जयंती के अवसर पर कई स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया है. इसके अलावा “रन फॉर यूनिटी” मैराथन का आयोजन दिल्ली, नागपुर, मुंबई जैसे मुख्य शहरों में किया गया. इसमें देश के राजनेता और खेल जगत के जाने-माने खिलाड़ियों ने भाग लिया. 

इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा तत्कालीन उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू मौजूद थे सभी लोगों ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की इसके अलावा भारत के जितने भी विदेशों में दूतावास है वहां पर स्मृति कार्यक्रम आयोजित किया गया ताकि सरदार बल्लभ भाई पटेल ने किस प्रकार भारत राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका निभाई उसके बारे में लोगों को बताया जा सके.

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Rashtriya Ekta Divas par Nibandh [1000 शब्द]

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व

राष्ट्रीय एकता दिवस का महत्व है देश की एकता के प्रति लोगों को जागरूक करना. हमारे देश में ऐसे कई लोग हैं जो हमारे राष्ट्रीय एकता को समाप्त करना चाहते हैं, ताकि भारत का विखंडन दोबारा से हो सके लेकिन हमें उनके मंसूबों को नाकाम करने का काम करना होगा और हम सभी लोगों को राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए मजबूती के साथ अपना कर्तव्य निभाना होगा, तभी जाकर भारत की राष्ट्रीय एकता मजबूत और सशक्त हो पाएगी और अखंड भारत का जो संकल्प सरदार वल्लभभाई पटेल के द्वारा लिया गया था उसे पूरा करने की जिम्मेदारी लेनी होगी. 

इसलिए हमारे देश में राष्ट्रीय एकता का बहुत ज्यादा महत्व है. भारत दुनिया का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और साथ में भारत की लोकतंत्र की व्यवस्था दूसरे देशों के मुकाबले काफी अलग है. 

जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गुजरात में 180 मीटर सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा बनाने का काम शुरू किया था. उसके बाद जब वह देश के प्रधानमंत्री पद पर गए तो उन्होंने उसका उद्घाटन 2014 में अपने हाथों से किया था और उन्होंने देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता के प्रतीक हैं और उन्होंने भारत के राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए जिस प्रकार अपना कर्तव्य निभाया है वह हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है. इसलिए हमें सरदार बल्लभ भाई पटेल के जीवन से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है तभी जाकर हम देश के सच्चे नागरिक बन पाएंगे. 

यह प्रतिमा सूरत से 150 किलोमीटर दूर स्थित है. राष्ट्रीय एकता दिवस के दिन लोग विभिन्न जगहों से सरदार वल्लभ भाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करने और संग्रहालय का दौरा करने आते हैं. 

राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने का तरीका 

2014 के बाद से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के बारे में जागरूकता बढ़ाने और महान व्यक्ति को याद करने के लिए राष्ट्रव्यापी मैराथन का आयोजन किया जाता है. इसमें देश के बहुत सारे युवा सम्मिलित होते है, ताकि राष्ट्रीय एकता की भावना उसके अंदर विकसित हो सके. 

इसके अलावा देश के विभिन्न शहरों में भिन्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और देश के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर फूल अर्पित कर कर उनके प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हैं. इसके बाद सरकार द्वारा शपथ ग्रहण समारोह एवं मार्च फ़ास्ट भी की जाती है. 

राष्ट्रीय एकता दिवस के पावन अवसर पर स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अन्य शैक्षणिक संसथान, राष्ट्रीय कैडेट कोर,  राष्ट्रीय सेवा योजना के लोग बहुत बढ़ चढ़ कर इस कार्यक्रम में हिस्सा लेते है. 

दिल्ली में विजय चौक से लेकर इंडिया गेट के बीच में मैराथन प्रतियोगिता आयोजित की जाती है जिसमें कई नेता, अभिनेता हिस्सा लेते है. इसके अलावा सरकारी ऑफिस, पब्लिक सेक्टर में भी शपथ ग्रहण कार्यक्रम होता है. 

स्कूल, कॉलेज आदि में विभिन्न प्रकार का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जहां पर बैनर, पोस्टर , कविता, वाद विवाद, जीके कंपटीशन, भाषण प्रतियोगिता, इत्यादि प्रोग्राम आयोजित करते हैं जिसमें छात्र बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं और जीतने वाले छात्रों को स्कूल की तरफ से पुरस्कृत भी किया जाता है. 

राष्ट्रीय एकता से लाभ 

राष्ट्रीय एकता के द्वारा हमारा देश मजबूत और विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर उदय होगा जो प्रत्येक देशवासियों के लिए गर्व की बात होगी. कोई भी देश की सबसे बड़ी शक्ति होती है उस देश की राष्ट्रीय एकता.

जिस राष्ट्र में एकता होगी उस राष्ट्र को कोई भी देश उन्नति करने से रोक नहीं सकता है. इसलिए राष्ट्रीय एकता के माध्यम से भारत मजबूत होगा और तेजी के साथ उन्नति के रास्ते पर अग्रसर होगा ताकि भारत दुनिया का शक्तिशाली राष्ट्र बन पाएगा. 

राष्ट्रीय एकता को खतरा

देश की राष्ट्रिय एकता को सबसे बड़ा खतरा आतंकवाद से है. आतंकवाद भारत के नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी समस्या है. भारत के कश्मीर, नागालैंड, मिजोरम जैसे जगह पर शांति के ना होने पीछे आतंकवाद का बहुत बड़ा हाथ है.

आतंकवाद किसी भी देश की राष्ट्रीय एकता को समाप्त कर सकता है. आतंकवादियों का प्रयास होता है कि देश में किस प्रकार अशांति फैलाई जा सके, ताकि यहां पर लूटमार और देश के सरकार को अस्थिर किया जा सके. जिसके फलस्वरूप इसका लाभ दूसरे देश उठा सके. 

हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन की हमेशा कोशिश होती है कि भारत का माहौल खराब हो लेकिन हमारी सेना भारत की रक्षा के लिए दिन-रात बॉर्डर पर तत्पर रहती है. इसलिए हमें अपने देश के राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए आतंकवाद जैसे भयंकर बीमारी को समाप्त करना होगा तभी जाकर हमारे राष्ट्रीय एकता सुरक्षित हो पाएगी. 

जम्मू कश्मीर में विशेष राज्य का दर्जा हो या पंजाब में खालिस्तान की मांगों या असम और गोरखालैंड के बीच पूरी मनमुटाव की स्थिति का होना. इसके पीछे देश की सबसे घटिया राजनीति है. कुछ राजनेता इन सब चीजों के माध्यम से अपना वोट बैंक साधने की कोशिश करते हैं और इसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ता है. 

इसलिए हम सबको जागरूक होने की जरूरत है और ऐसे नेताओं को हम वोट ना दें और ना ही उसका समर्थन करें तभी जाकर हमारा राष्ट्र मजबूत बन पाएगा, क्योंकि राष्ट्र से बड़ा भारत का कोई भी व्यक्ति नहीं है. चाहे वह प्रधानमंत्री हो या राष्ट्रपति और राष्ट्र सर्वोपरि होता है, और इसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य होना चाहिए.

Rashtriya Ekta Divas Par Shayari
Shayari on National Unity Day

इस देश के हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई सभी परस्पर प्रेम से रहना चाहते हैं, लेकिन भ्रष्ट राजनेता उन्हें बॉटकर अपना उल्लू सीधा करने में जुटे रहते है. इन समस्याओं के समाधान का उत्तरदायित्व मात्र राजनेताओं अथवा प्रशासनिक अधिकारियों का ही नहीं है, इसके लिए तो सम्पूर्ण जनता को मिल-जुलकर प्रयास करना होगा.

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इस साल (2022) राष्ट्रीय एकता दिवस का विषय (theme) क्या है?

इस साल का राष्ट्रीय एकता दिवस 2022 का विषय (Rashtriya Ekta Diwas 2022 Theme) अभी तक निर्धारित नहीं किया गया है, हालांकि भारत सरकार की हर साल एक अलग थीम होती है.  

2016 के राष्ट्रीय एकता दिवस का विषय “भारत की एकता (Integration of India)” था.  2019 में राष्ट्रीय एकता दिवस का लक्ष्य “राष्ट्र को एक साथ लाना, संघर्ष और बढ़ते उग्रवाद के समय में एकजुट होना (To bring the nation together, united in times of strife and rising extremism)” था. 

वहीं 2020 के अभियान का नारा था “अनेकता में एकता, समानता में एकता से बेहतर है (Unity in diversity is better than unity in similarities)”.  

पिछले साल, 2021 में, राष्ट्रीय एकता दिवस की थीम “आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)” था. 

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कुछ अच्छी शायरी कौन सी है?

राष्ट्रीय एकता दिवस पर कुछ अच्छी शायरी (Best Rashtriya Ekta Diwas Shayari in Hindi) निम्नलिखित है:

सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें

आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत 

~ बशीर बद्र

सब को उल्फ़त के मरकज़ पे लाऊँगा मैं

एकता का दिया फिर जलाऊँगा मैं

~ कँवल डिबाइवी

वो दिलों में आग लगाएगा मैं दिलों की आग बुझाऊंगा

उसे अपने काम से काम है मुझे अपने काम से काम है

~ बशीर बद्र

जाति और धर्म के नाम पर दूसरों को नीचा दिखाते हो, मुझे बताओ किस तरह तुम देश की एकता बढ़ाते हो?

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना

हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा

~ अल्लामा इक़बाल

राष्ट्रीय एकता दिवस पर निबंध – FAQs 

राष्ट्रीय एकता क्या है?

राष्ट्रीय एकता का तात्पर्य है किसी भी देश में विभिन्न धर्म के मानने वाले लोग उनकी भाषा का अलग होना लेकिन सभी के बीच परस्पर भाईचारा और प्रेम की भावना होना ही राष्ट्रीय एकता कहलाती है.

राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत कब की गई?

राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत 2014 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा किया गया था.

राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया जाता है?

भारत में प्रतिवर्ष 31 अक्टूबरः के दिन सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

राष्ट्रीय एकता होना आवश्यक क्यों है?

राष्ट्रीय एकता होना परम आवश्यक है इसके द्वारा देश में राजनीतिक एकता वीकी भावना आती है राजनीतिक एकता का मतलब होता है कि लोग किसी भी धर्म जाति के हो लेकिन उनके बीच भाईचारा और प्रेम की भावना का होना आवश्यक है तभी जाकर देश मजबूत और सशक्त बन पाता है क्योंकि अगर देश के निवासियों में भाईचारा और एकता नहीं होगी तो देश की नींव कमजोर पड़ सकती है.

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